पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल अवसंरचना और यात्री सेवाओं के विकास के आधुनिकीकरण में अपनी मजबूत गति बरकरार रखा है। इस संबंध में मुख्यालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अंतर्गत 13जोड़ी ट्रेनों को पारंपरिक आईसीएफ कोचों से आधुनिक एलएचबी रेक में बदला जा रहा है, जिससे बेहतर सुरक्षा, अधिक आरामदायक यात्रा और उच्च परिचालन दक्षता सुनिश्चित होगी। वही एनएफआर में विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें मार्च 2025 तक कुल 3,724.57 रूट किलोमीटर विद्युतीकृत हो चुका है। वर्ष 2024-25 के दौरान 1,141.38 रूट किलोमीटर में विद्युतीकरण कार्य पूर्ण किया गया, जबकि 2025-26 में 07 अक्टूबर 2025 तक 146.44 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप, एनएफआर के अंतर्गत कुल विद्युतीकृत नेटवर्क 3871 रूट किलोमीटर तक पहुँच गया है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि मंडल स्तर पर विद्युतीकरण की स्थिति इस प्रकार है- कटिहार मंडल में 788.55 आरकेएम, अलीपुरद्वार मंडल में 713.87 आरकेएम, रंगिया मंडल में 782.72 आरकेएम, लामडिंग मंडल में 1,104.63 आरकेएम तथा तिनसुकिया मंडल में 481.21 आरकेएम। यह प्रगति पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थायी, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संरक्षा पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में लगातार बनी हुई है। ज़ोन में आधुनिक सिग्नलिंग एवं इंटरलॉक्ड व्यवस्थाओं के माध्यम से लेवल क्रॉसिंग फाटकों को सुदृढ़ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब 624 इंटरलॉक्ड एलसी फाटक सेवा में हैं तथा 582 स्लाइडिंग बूम की स्थापना से सड़क पर दृश्यता और संरक्षा में सुधार हुआ है।
जबकि तकनीक आधारित उपायों के तहत, एआई आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम को प्रमुख हाथी गलियारों में स्थापित किया गया है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ रेल दुर्घटनाओं की रोकथाम की जा सके। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, केवल वर्ष 2025 में ही 160 से अधिक हाथियों के जान की सफलतापूर्वक रक्षा की जा सकी है, जो यात्रियों और पर्यावरण- दोनों की सुरक्षा के प्रति एनएफआर की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
राष्ट्रीय विकास में एनएफआर के योगदान को हाल ही में मिज़ोरम के आइज़ोल में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह के दौरान रेखांकित किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बइरबी –सायरंग रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने आइज़ोल को भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा रोजगार तक बेहतर पहुँच के माध्यम से जीवन में परिवर्तन लाने की इसकी क्षमता को रेखांकित किया। इसी कार्यक्रम में श्री मोदी ने “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के अंतर्गत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाते हुए भारत की विकास गाथा में रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर किया। क्षेत्रीय सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करते हुए, हयबरगांव रेलवे स्टेशन असम का पहला स्टेशन बना, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर में पुनर्विकसित 103 अमृत स्टेशनों के राष्ट्र को समर्पण कार्यक्रम के तहत उद्घाटित किया गया। यह आधुनिक, यात्री-केंद्रित अवसंरचना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कनेक्टिविटी की उपलब्धियों के अतिरिक्त, एनएफआर की रेलवे सुरक्षा बल ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 174 खोए हुए मोबाइल फोन सफलतापूर्वक बरामद किए, जिनमें से त्वरित कार्रवाई के फलस्वरूप 146 मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए। ये सभी उपलब्धियाँ सामूहिक रूप से संरक्षा, आधुनिकीकरण, यात्री संतुष्टि और क्षेत्रीय विकास के प्रति एनएफआर की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
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