बिहार के कटिहार जिला स्थित कर्नल एकेडमी में स्पिक मैके के द्वारा कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख कलाकार रूद्र शंकर मिश्रा, उदय शंकर मिश्रा और राघवेन्द्र शर्मा थे।इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नर्तक रुद्र शंकर मिश्रा ने अपनी भावपूर्ण और सधी हुई प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया गया।इस प्रस्तुति में तबले पर उदय शंकर मिश्रा, गायन में राघवेन्द्र शर्मा ने संगत की। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने विद्यालय के प्रांगण को सांस्कृतिक सुरों और नृत्य की लय से सराबोर कर दिया।रुद्र शंकर मिश्रा कथक नर्तक हैं। वह बनारस घराने से हैं, उन्हें उनके पिता (माता प्रसाद मिश्रा) और चाचा ने प्रशिक्षित किया था, और अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं।रुद्र वाराणसी के रहने वाले हैं।अपने बचपन को याद करते हुए रुद्र बताते हैं कि उनका पूरा परिवार इस क्षेत्र से जुड़ा है और वह ऐसी जगह पले-बढ़े हैं जहां दिन भर संगीत सुनने और कार्यक्रमों में अपने पिता की परफॉर्मेंस देखने के आदी थे। जब वे दो साल के थे, तब उन्होंने अपने पिता के साथ स्विटजरलैंड में भी परफॉर्म किया था। वह बीकॉम ग्रेजुएट हैं। उसके बाद, उन्होंने कथक के क्षेत्र में स्नातकोत्तर किया, और वर्तमान में वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से कथक में अपनी पीएचडी कर रहे हैं।कथक नर्तक रुद्र का मानना है कि एक अच्छा कलाकार बनने के लिए अपने गुरु के प्रति कड़ी मेहनत, अभ्यास और समर्पण जरूरी है। उन्होंने पूरी दुनिया में प्रदर्शन किया है और कला के रूप को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के साथ भी काम कर रहे हैं।अपनी गलतियों के बारे में बोलते हुए, रुद्र कहते हैं कि कभी-कभी, अपने अति आत्मविश्वास में, उन्होंने प्रदर्शन करते समय कुछ गलतियाँ कीं।रुद्र सलाह देते हैं कि कला के इस रूप में महारत हासिल करने के लिए आवश्यक वर्षों की गणना करने के बजाय इसे जीवन भर के लिए एक जुनून के रूप में अपनाएं। अपने गुरु के मार्गदर्शन में हृदय की पवित्रता और विश्वास इस कला को वास्तव में सीखने के लिए आवश्यक शर्तें हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ कर्नल एकेडमी के प्रमुख कर्नल अक्षय यादव, निदेशक अरुण कुमार और विद्यालय के प्राचार्य राजीव एंड्रू ने अतिथि रुद्र शंकर मिश्रा और उदय शंकर मिश्रा एवं राघवेन्द्र शर्मा के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षक, छात्र-छात्राएं और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की इस अनुपम प्रस्तुति की सराहना की और कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में भारतीय कला, संस्कृति और परंपरा के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न करते हैं।भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को युवाओं में बढ़ावा देने के लिए विद्यालय में स्पिक मैके कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस पर जानकारी देते हुए कर्नल एकेडमी के प्रमुख कर्नल अक्षय यादवने कहा कि कथक नृत्य उत्तर प्रदेश राज्य का नृत्य है। कर्नल अक्षय यादव ने आगे कहा कि कथक नृत्य आज भी भारत में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। विभिन्न शहरों और मंचों पर कथक कलाकार शास्त्रीय भाव, ताल और अभिव्यक्ति के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं। चाहे वह लखनऊ की शाम हो, दिल्ली का महोत्सव हो, या विदेशों में भारतीय कला की प्रस्तुति कथक नृत्य अपनी गरिमा और शैली के साथ हमेशा सबका ध्यान खींचता है इस तरह के नृत्य से बच्चे काफी लाभान्वित होंगे और उन्हें अन्य राज्यों की संस्कृति के संबंध में ज्ञार्नाजन होगा।कर्नल एकेडमी विद्यालय के प्राचार्य राजीव एंड्रू नेइस भव्य कथक नृत्य कार्यक्रम के समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है।सबसे पहले मैं हमारे प्रतिभाशाली कथक कलाकारों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति, मनमोहक मुद्राओं और तालबद्ध पदचाप से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा का अद्भुत प्रदर्शन किया। उनकी साधना, अनुशासन और समर्पण ने हम सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी शिक्षकगण एवं आयोजन समिति के सदस्यों का भी मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। साथ ही विद्यार्थियों और उपस्थित सभी दर्शकों का धन्यवाद, जिनके उत्साह और तालियों ने कलाकारों का मनोबल बढ़ाया।ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का माध्यम होते हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
















